महिला दिवस: 30 से 60 की उम्र तक, महिलाओं के लिए क्यों ज़रूरी हैं ये मेडिकल टेस्ट?
Ashlesha Thakur
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हम महिलाओं के अधिकारों, उनकी आज़ादी और उनके सपनों की बात करते हैं. लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि जो महिला पूरे परिवार का ख्याल रखती है, वह अक्सर अपनी ही सेहत को सबसे पीछे छोड़ देती है.
असली महिला सशक्तिकरण तभी है जब एक स्त्री शारीरिक और मानसिक रूप से मज़बूत हो. बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जिन्हें अगर समय रहते पहचान लिया जाए, तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है.
महिला दिवस के इस ख़ास मौके पर हमने डॉ. त्रिप्ती रहेजा (डायरेक्टर – ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली) से बात की और जाना कि 30 से लेकर 60 वर्ष की उम्र तक महिलाओं को कौन-कौन से मेडिकल टेस्ट करवाने चाहिए और अपनी डाइट और फ़िटनेस का कैसे ख्याल रखना चाहिए.
30 की उम्र: सेहत पर ध्यान देने की असली शुरुआत
30 की उम्र के बाद महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर ज़्यादा सतर्क हो जाना चाहिए. यह वह समय है जब नियमित हेल्थ चेक-अप शुरू कर देने चाहिए. डॉ. रहेजा महिलाओं के लिए इन ज़रूरी मेडिकल टेस्ट की सलाह देती हैं:
- पैप स्मीयर या HPV टेस्ट: इससे सर्वाइकल कैंसर का शुरुआती स्टेज में ही पता लगाया जा सकता है.
- ब्रेस्ट एग्ज़ाम या ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड: इससे ब्रेस्ट में किसी भी प्रकार की गांठ या असामान्य बदलाव का समय रहते पता चल सकता है.
- ब्लड शुगर टेस्ट: इस उम्र में डायबिटीज़ का ख़तरा या उसके शुरुआती लक्षण पहचाने जा सकते हैं.
- लिपिड प्रोफ़ाइल: यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर और दिल की बीमारी का जोखिम बताता है.
- थायरॉयड टेस्ट (TSH): महिलाओं में थायरॉयड की समस्या काफ़ी आम होती है, इसलिए इसकी जांच बेहद ज़रूरी है.
40 की उम्र: बढ़ती चुनौतियों के लिए रहें तैयार
40 की उम्र के बाद शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा होने लगता है और कुछ बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है. इसलिए, इस दौर में ये जांच ज़रूरी हो जाती हैं:
- मैमोग्राफ़ी: 40 के बाद ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती जांच के लिए यह टेस्ट सबसे अहम है.
- पैप स्मीयर या HPV टेस्ट: सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए इसे नियमित रूप से कराते रहें.
- ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफ़ाइल: हार्ट अटैक और डायबिटीज़ के ख़तरे को मॉनिटर करने के लिए.
- थायरॉयड फ़ंक्शन टेस्ट: थायरॉयड के असंतुलन को पहचानने में मदद करता है, जो इस उम्र की महिलाओं में थकान और वज़न बढ़ने का बड़ा कारण है.
50 की उम्र: मेनोपॉज़ और हड्डियों की सेहत
50 की उम्र के आसपास ज़्यादातर महिलाएं मेनोपॉज़ (Menopause) के दौर से गुज़रती हैं और एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण इस समय स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं.
- मैमोग्राफ़ी और पैप स्मीयर: डॉक्टर की सलाह के अनुसार इन कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट्स को जारी रखें.
- बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA स्कैन): मेनोपॉज़ के बाद हड्डियां तेज़ी से कमज़ोर होती हैं. यह स्कैन ऑस्टियोपोरोसिस का ख़तरा बताता है.
- रूटीन ब्लड टेस्ट: ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफ़ाइल के ज़रिए दिल और मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी समस्याओं पर नज़र रखें.
60 की उम्र: सक्रिय और स्वस्थ बुढ़ापा
60 की उम्र के बाद भी नियमित हेल्थ चेक-अप बहुत ज़रूरी है ताकि महिलाएं बीमारियों से आज़ाद होकर स्वस्थ जीवन जी सकें. 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए ये मेडिकल टेस्ट ज़रूरी हैं:
- बोन डेंसिटी टेस्ट: कमज़ोर हड्डियों और फ्रैक्चर के ख़तरे से बचने के लिए.
- विटामिन D और विटामिन B12 टेस्ट: उम्र बढ़ने के साथ इन विटामिन्स की कमी बहुत आम हो जाती है, जो नसों और हड्डियों दोनों के लिए नुकसानदायक है.
- ब्लड प्रेशर और लिपिड प्रोफ़ाइल: दिल की सेहत का सटीक आकलन करने के लिए.
- मैमोग्राफ़ी और शुगर टेस्ट: स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार इनकी नियमित निगरानी ज़रूरी है.
महिलाओं की डाइट कैसी होनी चाहिए?
डॉ. त्रिप्ती रहेजा के अनुसार, महिलाओं की डाइट संतुलित, पौष्टिक और सरल होनी चाहिए.
- प्रोटीन है ज़रूरी: खाने में अच्छा प्रोटीन ज़रूर होना चाहिए, जैसे अंडे, दूध, पनीर, दाल और चना. यह कमज़ोर होती मांसपेशियों को मज़बूत रखता है.
- विटामिन और मिनरल: फल और हरी सब्जियां भरपूर मात्रा में खाएं.
- साबुत अनाज: रोटी, ओट्स और ब्राउन राइस से शरीर को ऊर्जा और फ़ाइबर मिलता है.
- कैल्शियम और आयरन: महिलाओं के आहार में इनकी पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित होनी चाहिए. साथ ही, नट्स और बीजों से मिलने वाले हेल्दी फ़ैट्स भी ज़रूरी हैं.
- परहेज़: प्रोसेस्ड फ़ूड, ज़्यादा चीनी और जंक फ़ूड से जितना हो सके दूरी बनाए रखें.
फ़िट रहने के लिए महिलाओं के लिए ये ख़ास टिप्स
सेहत सिर्फ़ टेस्ट और डाइट तक सीमित नहीं है बल्कि फ़िट रहने के लिए इन सरल आदतों को भी अपनाना चाहिए:
- शारीरिक सक्रियता: नियमित व्यायाम जैसे वॉकिंग, योग या हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शरीर को मज़बूत बनाए रखती है.
- लाइफ़स्टाइल: पर्याप्त पानी पिएं और 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें.
- मानसिक स्वास्थ्य: घर और ऑफिस के तनाव को संभालना सीखें और अपनी मेंटल हेल्थ का पूरा ख्याल रखें.
- संकेतों को पहचानें: अपने शरीर के संकेतों को कभी नज़रअंदाज़ न करें. असामान्य ब्लीडिंग, ब्रेस्ट में गांठ या लगातार रहने वाली थकान होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें.
इस महिला दिवस (International Women’s Day) पर खुद से एक वादा करें. अपने परिवार के साथ-साथ अपनी सेहत को भी प्राथमिकता दें और समय-समय पर नियमित हेल्थ चेक-अप करवाएं, क्योंकि एक स्वस्थ महिला ही एक सशक्त समाज की नींव होती है.