• Zindagi With Richa
  • 08 February, 2026
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Zindagi With Richa

लेखक: प्रभांशु शुक्ला

क्या आपने कभी स्लीप डिवोर्स के बारे में सुना है?

एक समय था जब पति-पत्नी के बीच अनबन होती थी, तो वे नाराज़ होकर अलग-अलग कमरों में जाकर सो जाते थे. इसे रिश्ते में दरार माना जाता था. लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. आज कई कपल्स नाराज़गी की वजह से नहीं, बल्कि बेहतर नींद और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खुशी-खुशी अलग-अलग कमरों में सोने का फ़ैसला ले रहे हैं.

इसी ट्रेंड को दुनिया भर में स्लीप डिवोर्स कहा जा रहा है. आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में काम का दबाव, अलग-अलग दिनचर्या और डिजिटल लाइफ़स्टाइल कपल्स की नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं. ऐसे में कई लोग रिश्ते को नहीं, बल्कि नींद के तरीके को अलग करने का रास्ता चुन रहे हैं.

आखिर क्या है स्लीप डिवोर्स?

स्लीप डिवोर्स उस स्थिति को कहा जाता है, जब कोई कपल आपसी सहमति से अपनी नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए अलग-अलग बिस्तरों या कमरों में सोने का फ़ैसला करता है.

इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि उनके रिश्ते में प्यार कम हो गया है या कोई दूरी आ गई है. इसका सीधा मकसद होता है अच्छी नींद, बेहतर मूड और एक स्वस्थ रिश्ता. जब नींद पूरी होती है, तो चिड़चिड़ापन कम होता है और पार्टनर के साथ बिताया गया समय ज़्यादा खुशनुमा होता है.

एक्सपर्ट की राय: डॉ. प्रेरणा कोहली क्या कहती हैं?

मशहूर पॉडकास्ट ‘कड़क’ के दौरान वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. प्रेरणा कोहली ने पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध से इस बदलते ट्रेंड पर विस्तार से बात की.

डॉ. प्रेरणा कहती हैं: “आजकल स्लीप डिवोर्स बहुत कॉमन होता जा रहा है. यह अब घर-घर की कहानी बनती जा रही है आप अपने कमरे में रहिए और हम अपने कमरे में.”

इस ट्रेंड को समझाते हुए उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया.

एक बार वे किसी परिचित के घर गईं. बातचीत के दौरान उस व्यक्ति ने उन्हें अपना कमरा दिखाया और फिर एक दूसरे कमरे की ओर इशारा करते हुए कहा, “और ये मेरी पत्नी का कमरा है.”

डॉ. प्रेरणा को यह थोड़ा अजीब लगा. वजह पूछने पर उस व्यक्ति ने बताया कि उनकी पत्नी सुबह जल्दी उठकर पूजा-पाठ करती हैं, जबकि वे देर रात तक शेयर मार्केट का काम करते हैं. उस व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए कहा, “आप साइकोलॉजिस्ट लोग ही तो कहते हैं कि अच्छी नींद ज़रूरी होती है, इसलिए हमने अलग-अलग कमरों में सोने का फैसला किया.”

डॉ. प्रेरणा के अनुसार, हैरानी की बात यह थी कि उस कपल के बीच किसी तरह का कोई मतभेद नहीं था. वे एक-दूसरे के साथ बेहद खुश थे, बस अलग-अलग स्लीप पैटर्न और जैविक आदतों की वजह से उन्होंने यह व्यावहारिक रास्ता चुना था.

क्यों बढ़ रहा है स्लीप डिवोर्स का चलन?

आज के दौर में कपल्स के लिए एक ही समय पर सोना और जागना मुश्किल होता जा रहा है. इसके पीछे कई ठोस वजहें हैं:

  • काम के घंटे: एक पार्टनर की डे शिफ़्ट हो सकती है और दूसरे की नाइट शिफ़्ट.
  • खर्राटे: एक पार्टनर के खर्राटे दूसरे की नींद हराम कर सकते हैं.
  • डिजिटल आदतें: किसी को देर रात तक मोबाइल चलाना या वेब सीरीज़ देखना पसंद होता है, जबकि दूसरा अंधेरे में सोना चाहता है.
  • तापमान: किसी को AC में सोना पसंद है, तो किसी को पंखे में.
  • स्लीप पैटर्न: कोई ‘अर्ली बर्ड’ (जल्दी उठने वाला) है तो कोई ‘नाइट आउल’ (देर से सोने वाला).

इन कारणों से अगर नींद पूरी न हो, तो रिश्तों में बेवजह का तनाव और झगड़े बढ़ने लगते हैं.

आंकड़े क्या कहते हैं?

यह सिर्फ़ कही-सुनी बातें नहीं हैं. Vogue India मैगज़ीन द्वारा साल 2023 में किए गए एक सर्वे के अनुसार, करीब 19% शादीशुदा मिलेनियल कपल्स बेहतर नींद के लिए अलग-अलग सोना पसंद करते हैं.

यह आंकड़ा साफ़ करता है कि स्लीप डिवोर्स अब कोई अजीब या शर्म की बात नहीं, बल्कि एक ‘स्मार्ट चॉइस’ बनता जा रहा है. एक खुशहाल रिश्ते के लिए दो खुशहाल और तरोताज़ा इंसानों का होना ज़रूरी है, भले ही वे रात में अलग-अलग कमरों में क्यों न सोएं.