• Zindagi With Richa
  • 22 February, 2026
blog-image
Zindagi With Richa

लेखक- प्रभांशु शुक्ला

हाल ही में मशहूर शेफ़ विकास खन्ना ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में एक ऐसी बात लिखी, जो सिर्फ़ खाना बनाने के बारे में नहीं थी, बल्कि जीवन की लय के बारे में थी. उन्होंने स्वीकार किया कि सालों तक उन्हें लगता रहा कि खाना सिर्फ़ उनका पेशा है.

लेकिन अब उन्हें समझ आया है, “भोजन मेरा संतुलन है.”

और इस गहरी समझ के पीछे था आयुर्वेद. यानी एक ऐसी आयुर्वेदिक जीवनशैली, जो धीरे-धीरे महज़ एक डाइट से आगे बढ़कर जीवन-दृष्टि बन जाती है.

मशहूर शेफ़ विकास खन्ना ने बताया कि कैसे आयुर्वेद और ‘गट हेल्थ’ ने उनकी ज़िंदगी बदल दी.

जब शरीर समय भूलने लगे

अलग-अलग टाइम ज़ोन, लंबी उड़ानें, देर रात तक काम, सुबह की शूटिंग और क्रिएटिव दबाव, ये सब बाहर से किसी बड़ी सफलता की कहानी लगती है.

लेकिन भीतर? भीतर शरीर धीरे-धीरे यह भूलने लगता है कि सुबह कहाँ शुरू होती है और रात कहाँ ख़त्म. थकान पहले शरीर में दिखती है, फिर मन में उतर जाती है. स्पष्टता  कम होने लगती है, धैर्य जवाब दे जाता है और कृतज्ञता भी धुंधली हो जाती है.

विकास खन्ना ने लिखा कि वो काम से नहीं थके थे, वो अपनी ‘टूटी हुई लय’ से थक गए थे. और यहीं से शुरू हुआ उनका आयुर्वेद और मानसिक स्वास्थ्य के बीच के गहरे संबंध को समझने का सफ़र.

आयुर्वेद: जब आहार बन गया “एंकर”

आयुर्वेद कहता है कि शरीर प्रकृति के साथ तालमेल चाहता है. शायद आधुनिक जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी ही यही है कि हमने ‘घड़ी’ को ‘सूर्य’ से बड़ा बना दिया है.

शेफ़ विकास खन्ना ने अपनी आयुर्वेदिक डाइट रूटीन में छोटे लेकिन बेहद गहरे बदलाव किए:

  • सूर्योदय से पहले गुनगुना पानी पीना.
  • सादा और मौसमी भोजन करना.
  • ग्लूटेन का कम सेवन.
  • शक्कर कम खाना.
  • रात का भोजन जल्दी कर लेना.

यह कोई सख़्त डाइट नहीं थी; यह एक अलाइनमेंट था. यानी सूर्य के अनुसार भोजन करना.

वे कहते हैं, “जब मैं घड़ी के अनुसार नहीं, बल्कि सूर्य के अनुसार खाता हूँ, तो मन शांत हो जाता है. विचार स्पष्ट हो जाते हैं और प्रतिक्रियाएँ कोमल हो जाती हैं.” यही गट हेल्थ और मानसिक संतुलन का वह गहरा संबंध है, जिसे हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं.

गट हेल्थ और मेंटल हेल्थ: एक ही संवाद

आज का आधुनिक विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि गट हेल्थ और मानसिक स्वास्थ्य गहराई से जुड़े हुए हैं. आयुर्वेद यह बात सदियों से कहता आया है.

बेचैन पेट की वजह से बेचैन मन होता है. पोषित शरीर ही भावनात्मक स्थिरता लाता है. हमारी आंत सिर्फ़ पाचन का काम नहीं करती, वह हमारी स्मृतियों, मूड और ऊर्जा को भी प्रभावित करती है. जब हम शरीर को संतुलित करते हैं, तो मन ख़ुद-ब-ख़ुद स्थिर होने लगता है. यही कारण है कि आयुर्वेद में मौसमी भोजन और पाचन संतुलन पर विशेष ज़ोर दिया गया है.

जेट लैग सिर्फ़ नींद नहीं, पाचन भी है

महाद्वीपों के बीच लगातार यात्रा करते हुए विकास खन्ना ने एक गहरी बात समझी, जेट लैग सिर्फ़ नींद का बिगड़ना नहीं है, यह पाचन का असंतुलन भी है.

जब शरीर भोजन, प्रकाश और दिनचर्या के माध्यम से समय को पहचानना सीख लेता है, तो मन फिर से स्थिरता पा लेता है. यही आयुर्वेद का मूल विचार है: जीवनशैली ही सबसे बड़ी औषधि है.

अनुशासन: पाबंदी नहीं, आत्मसम्मान है

उन्होंने बड़ी बेबाकी से लिखा कि वो अभी भी सीख रहे हैं. कई दिन वो इसमें असफल भी होते हैं. लेकिन अब वो समझते हैं कि डाइट में अनुशासन कोई बाध्यता या सज़ा नहीं है, यह आत्मसम्मान है.

उनकी सुबह की साधारण-सी दिनचर्या जिसे हम आयुर्वेदिक मॉर्निंग रूटीन कह सकते हैं, धीरे-धीरे उनकी मानसिक स्पष्टता का मज़बूत आधार बनती गई. भोजन अब उनके काम को ही नहीं, बल्कि उनकी शांति को भी पोषित करता है.

भोजन सिर्फ़ ऊर्जा नहीं, चेतना है

हममें से अधिकांश लोग सिर्फ़ खाना खाते हैं, पर शायद बहुत कम लोग भोजन के साथ संवाद करते हैं.

विकास खन्ना का यह चिंतन हमें याद दिलाता है कि आयुर्वेद सिर्फ़ जड़ी-बूटियों का विज्ञान नहीं, बल्कि जीवन की लय का विज्ञान है. जब हम सूर्य के साथ खाते हैं, प्रकृति के साथ चलते हैं, और अपने शरीर की सुनते हैं, तो मन भी शांत होना सीख जाता है. और शायद वहीं से शुरू होता है, भोजन और चेतना का असली संबंध.

Comments

Write Your Comment