FAQ | वेनेजुएला संकट 2026: मादुरो की गिरफ्तारी, नई राष्ट्रपति और भारत पर असर
Zindagi With Richa
लेखक- अश्लेषा ठाकुर
साल 2026 की शुरुआत वेनेजुएला के लिए एक नाटकीय और अशांत मोड़ लेकर आई है. 1 जनवरी को शुरू हुई सैन्य हलचल और 3 जनवरी को अमेरिकी सेना के ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व के तहत राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की नाटकीय गिरफ्तारी ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. दक्षिण अमेरिका का यह तेल समृद्ध देश आज एक गहरे राजनीतिक और मानवीय संकट के मुहाने पर खड़ा है. इस घटनाक्रम का असर न केवल वैश्विक राजनीति पर पड़ा है, बल्कि भारत जैसे प्रमुख तेल आयातक देशों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए भी यह एक बड़ा सवाल बन गया है. भारतीय विदेश मंत्रालय की संतुलित प्रतिक्रिया से लेकर काराकस की गलियों में जमीनी हकीकत तक, इस संकट से जुड़े हर महत्वपूर्ण पहलू को समझने के लिए हमने यह विस्तृत वेनेजुएला संकट 2026 FAQ तैयार किया है. यहां आपको वेनेजुएला के ताजा हालातों और भारत पर इसके संभावित प्रभाव से जुड़ी हर सटीक जानकारी मिलेगी.
वेनेजुएला संकट 2026 FAQ
- वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो अभी कहां हैं और उनपर क्या आरोप लगे हैं? 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी विशेष बलों ने काराकस में एक गुप्त छापेमारी के दौरान मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोर्स को हिरासत में ले लिया. वर्तमान में वह न्यूयॉर्क की जेल में हैं, जहां उन पर ‘नार्को-टेररिज़्म’ और नशीले पदार्थों की तस्करी के गंभीर आरोप हैं. 5 जनवरी को उन्होंने अदालत में खुद को निर्दोष बताया है.
- वेनेजुएला में अभी सत्ता किसके हाथ में है? मादुरो की गिरफ्तारी के बाद, वहां की नेशनल असेंबली ने 5 जनवरी 2026 को डेल्सी रोड्रिगेज को कार्यकारी राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई है. हालांकि, देश की सीमाओं और तेल बुनियादी ढांचे पर अमेरिकी सेना का कड़ा नियंत्रण बना हुआ है.
- वेनेजुएला संकट पर भारत सरकार का आधिकारिक रुख क्या है? भारत के विदेश मंत्रालय ने इस स्थिति को गहरी चिंता का विषय बताया है. भारत ने किसी देश का नाम लिए बिना शांतिपूर्ण संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता की अपील की है. भारत सरकार के बयान में ये भी कहा गया कि उनका ध्यान वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता पर है.
- 1 जनवरी 2026 को ऐसा क्या हुआ जिसने युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी? नए साल के पहले ही दिन अमेरिका ने अपने कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को वेनेजुएला के तट पर तैनात कर दिया था. इसके जवाब में मादुरो ने ‘राष्ट्रीय प्रतिरोध’ का आह्वान किया और नागरिकों को हथियार उठाने को कहा. इसी तनाव के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की चेतावनी जारी की थी.
- क्या इस संकट का असर भारत की तेल आपूर्ति और पेट्रोल की कीमतों पर पड़ेगा? रॉयटर्स और द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, भारत पर इसका सीधा असर कम होगा क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत पहले ही वेनेजुएला से तेल आयात (कुल आयात का मात्र 0.3%) बहुत कम कर चुका है. हालांकि, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता भारत के लिए अप्रत्यक्ष रूप से चिंता का विषय हो सकती है.
- वहां मौजूद भारतीय नागरिकों के लिए क्या सुरक्षा उपाय किए गए हैं? भारत ने वेनेजुएला के लिए ‘लेवल 4’ ट्रेवल एडवाइजरी जारी की है. काराकस स्थित भारतीय दूतावास लगातार वहां रह रहे भारतीय समुदाय के संपर्क में है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रहने या उपलब्ध व्यावसायिक उड़ानों से स्वदेश लौटने की सलाह दी गई है.
- ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ में कितने लोग हताहत हुए? विभिन्न समाचार एजेंसियों के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई में लगभग 80 लोगों की मौत हुई है. इनमें मादुरो की सुरक्षा में तैनात 32 क्यूबाई सुरक्षाकर्मी और 23 वेनेजुएलियाई सैनिक शामिल हैं. अमेरिकी सेना ने अपने किसी भी सैनिक की मौत की खबर नहीं दी है, हालांकि 7 सैनिक घायल हुए हैं.
- वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति की क्या स्थिति है? वेनेजुएला वर्तमान में दुनिया की सबसे खराब आर्थिक स्थितियों में से एक का सामना कर रहा है, जहां मुद्रास्फीति की दर 682% तक पहुंच गई है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, लगभग 7.9 मिलियन लोगों को भोजन और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तत्काल सहायता की जरूरत है.
- क्या रिलायंस और ONGC Videsh जैसी भारतीय कंपनियों पर इसका असर होगा? इन कंपनियों के वेनेजुएला में पुराने निवेश और तेल क्षेत्र मौजूद हैं. अमेरिकी नियंत्रण के बाद अगर प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो भविष्य में इन कंपनियों के लिए वहां काम करना आसान हो सकता है, लेकिन फ़िलहाल वहां सभी ऑपरेशन सुरक्षा कारणों से रुके हुए हैं.
- अंतरराष्ट्रीय समुदाय की इस पर क्या प्रतिक्रिया है? रूस, चीन और ईरान ने इस कार्रवाई को वेनेजुएला की संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है. दूसरी ओर, कई पश्चिमी देशों ने इसे ‘लोकतंत्र की बहाली’ की दिशा में एक कदम माना है, जिससे दुनिया दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है.
ये थी वेनेजुएला संकट 2026 पर तैयार की गई FAQ. वेनेजुएला की यह स्थिति पल-पल बदल रही है और आने वाले हफ्तों में वहां का राजनीतिक नक्शा पूरी तरह बदल सकता है. हालांकि निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और अमेरिकी हस्तक्षेप को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग राय है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि देश इस समय भारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है. हमने इस रिपोर्ट को तैयार करने में Reuters, Al Jazeera और BBC जैसे विश्वसनीय स्रोतों के तथ्यों का सहारा लिया है ताकि आप तक निष्पक्ष और सटीक जानकारी पहुंच सके. ‘Zindagi With Richa’ का उद्देश्य आपको केवल ख़बरों से ही नहीं, बल्कि उन वैश्विक बदलावों से भी जोड़ना है जो भारत और हम सभी के जीवन पर प्रभाव डालते हैं.