• Zindagi With Richa
  • 28 February, 2026
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Zindagi With Richa

लेखक- प्रभांशु शुक्ला

बीसीसीआई क्रिकेट बोर्ड आज दुनिया का सबसे अमीर और शक्तिशाली क्रिकेट बोर्ड है. इंडियन प्रीमियर लीग के मीडिया अधिकार, अंतरराष्ट्रीय श्रृंखलाएं और भारी-भरकम प्रसारण सौदों के ज़रिए बीसीसीआई हर साल हज़ारों करोड़ रुपये कमाता है.

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस विशाल आर्थिक शक्ति की असली नींव 1991 में दक्षिण अफ़्रीका की भारत यात्रा के दौरान पड़ी थी. यह सिर्फ़ एक क्रिकेट सीरीज़ नहीं थी बल्कि यह भारतीय क्रिकेट के आर्थिक पुनर्जागरण की शुरुआत थी.

दक्षिण अफ़्रीका पर ICC का प्रतिबंध क्यों लगा था?

साल 1970 में इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने दक्षिण अफ़्रीका की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसका मुख्य कारण वहां की ‘अपार्थाइड’ नीति थी, जो नस्लीय भेदभाव पर आधारित थी. इस व्यवस्था के तहत अश्वेत खिलाड़ियों को समान अवसर और अधिकार नहीं दिए जाते थे.

पूरी दुनिया में इस अमानवीय नीति का भारी विरोध हुआ और खेल जगत ने भी दक्षिण अफ़्रीका का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया. इसके परिणामस्वरूप, पूरे 22 वर्षों तक दक्षिण अफ़्रीका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर रहा. यह खेल इतिहास के सबसे लंबे बहिष्कारों में से एक था.

1991 में भारत ने दक्षिण अफ़्रीका की कैसे मदद की?

1991 में रंगभेद व्यवस्था के समाप्त होने के बाद दक्षिण अफ़्रीका ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की कोशिश शुरू की. उस मुश्किल समय में भारत और बीसीसीआई ने ICC में दक्षिण अफ़्रीका की वापसी का खुलकर समर्थन किया. भारत ने उनके साथ पहली आधिकारिक एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सीरीज़ खेलने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा.

यह निर्णय केवल खेल तक सीमित नहीं था, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और नैतिक संदेश भी था कि खेल हर तरह के भेदभाव से ऊपर है. भारत का यह क़दम दक्षिण अफ़्रीका के लिए एक प्रतीकात्मक समर्थन था और वैश्विक मंच पर उसकी शानदार पुनर्वापसी की घोषणा भी.

जब बीसीसीआई को दूरदर्शन को भुगतान करना पड़ता था!

यह सुनकर आपको शायद हैरानी होगी कि 1991 से पहले भारत में क्रिकेट मैचों का प्रसारण दूरदर्शन पर होता था, और उस दौर में बीसीसीआई को मैचों के प्रसारण के लिए दूरदर्शन को अपनी जेब से भुगतान करना पड़ता था यानी, देश में क्रिकेट लोकप्रिय तो तेज़ी से हो रहा था, लेकिन उससे बीसीसीआई को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा था. क्रिकेट उस समय महज़ एक ‘भावना’ थी वह अभी एक व्यावसायिक मॉडल नहीं बना था.

दक्षिण अफ़्रीका ने दिया एक ‘क्रांतिकारी विचार’

1991 में दक्षिण अफ़्रीका की भारत यात्रा के दौरान पहली बार यह विचार सामने आया कि क्रिकेट के प्रसारण अधिकारों को बेचा जा सकता है.

दक्षिण अफ़्रीकी क्रिकेट प्रशासकों ने पहले ही यह समझ लिया था कि टेलीविज़न अधिकार एक बहुमूल्य संपत्ति हैं. उन्होंने बीसीसीआई के अधिकारियों को समझाया कि मैचों के प्रसारण अधिकारों का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन कर उन्हें निजी चैनलों को भारी कीमत पर बेचा जा सकता है.

यहीं से भारतीय क्रिकेट की सोच पूरी तरह से बदल गई. यहीं से यह समझ बनी कि क्रिकेट केवल एक खेल नहीं है, बल्कि एक संगठित उद्योग भी हो सकता है. यही एक विचार आगे चलकर भारतीय क्रिकेट की आर्थिक क्रांति का मुख्य आधार बना.

बीसीसीआई ने क्रिकेट को ‘उद्योग’ कैसे बनाया?

1991 के इस ज्ञान के बाद बीसीसीआई ने कई बड़े और दूरदर्शी निर्णय लिए:

  • प्रसारण अधिकारों की नीलामी: टीवी राइट्स को प्राइवेट चैनलों को बेचना शुरू किया.
  • स्पॉन्सरशिप: टीम की जर्सी और मैदान में विज्ञापन का मॉडल विकसित किया.
  • राजस्व का नया स्रोत: द्विपक्षीय श्रृंखलाओं को कमाई का प्रमुख ज़रिया बनाया.
  • टीवी-केंद्रित उत्पाद: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को एक बेहतरीन टेलीविज़न-केंद्रित उत्पाद के रूप में प्रस्तुत किया.

1990 के दशक के अंत तक क्रिकेट भारत का सबसे बड़ा ‘टेलीविज़न कंटेंट’ बन चुका था. इसके बाद निजी चैनलों के आगमन और उदारीकरण की नीतियों ने इस आर्थिक प्रक्रिया को रॉकेट जैसी गति दी.

IPL: आर्थिक विस्फोट और क्रिकेट का नया युग

इस व्यावसायिक सोच का सबसे बड़ा और सफल उदाहरण है इंडियन प्रीमियर लीग, जिसकी शुरुआत 2008 में हुई.

IPL ने क्रिकेट को सीधे तौर पर मनोरंजन, विज्ञापन, फ़िल्म और कॉरपोरेट जगत से जोड़ दिया. आज इसके मीडिया अधिकार अरबों डॉलर में बिकते हैं. फ़्रेंचाइज़ी मॉडल, खिलाड़ियों की नीलामी और वैश्विक प्रसारण ने इसे दुनिया की सबसे समृद्ध क्रिकेट लीग बना दिया है. आईपीएल ने बीसीसीआई को सिर्फ़ अमीर नहीं बनाया, बल्कि उसे वैश्विक क्रिकेट राजनीति का सबसे प्रभावशाली केंद्र बना दिया.

आर्थिक तुलना: बीसीसीआई बनाम अन्य बोर्ड

आंकड़े खुद इस सफलता की गवाही देते हैं. वर्ष 2025 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार:

  • बीसीसीआई की कुल संपत्ति: लगभग ₹18,760 करोड़ (करीब 2.25 अरब अमेरिकी डॉलर).
  • क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की संपत्ति: लगभग ₹658 से ₹708 करोड़ (करीब 79 मिलियन अमेरिकी डॉलर).

इस तुलना से स्पष्ट है कि बीसीसीआई अन्य क्रिकेट बोर्डों की तुलना में कई गुना अधिक समृद्ध है. यह ज़मीन-आसमान का अंतर केवल भारत के बड़े बाज़ार के आकार का नतीजा नहीं है बल्कि यह उन दूरदर्शी आर्थिक निर्णयों का परिणाम है, जिनकी शुरुआत 1991 में हुई थी.

एक ऐतिहासिक मोड़

आज पीछे मुड़कर देखें तो कहा जा सकता है कि 1991 की दक्षिण अफ़्रीका-भारत सीरीज़ केवल एक क्रिकेट आयोजन नहीं थी. वही वह ऐतिहासिक मोड़ था, जब बीसीसीआई  ने समझा कि क्रिकेट एक भावना भी है और एक बहुत बड़ा व्यवसाय भी.

अगर वह सीरीज़ न होती, अगर दक्षिण अफ़्रीका से प्रसारण अधिकारों का वह विचार न आता, तो शायद भारतीय क्रिकेट आज इस बेजोड़ आर्थिक ऊंचाई पर न होता.

1991 ने भारतीय क्रिकेट की दिशा बदली. 2008 ने उसे एक नया विस्तार दिया. और आज नतीजा हम सबके सामने है, बीसीसीआई वैश्विक क्रिकेट का सबसे शक्तिशाली संस्थान है.

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