• Zindagi With Richa
  • 17 May, 2026
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High BP Reversal: क्या सच में दवाएं बंद हो सकती हैं? जानें सच

Ashlesha Thakur

World Hypertension Day: आजकल इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एक शब्द बहुत तेज़ी से ट्रेंड कर रहा है,  ‘हाइपरटेंशन रिवर्सल’ (Hypertension Reversal or High BP Reversal). कई वीडियो और आर्टिकल में यह दावा किया जाता है कि आप अपनी हाई बीपी (High BP) की बीमारी को हमेशा के लिए जड़ से ख़त्म कर सकते हैं.

लेकिन क्या मेडिकल साइंस इस ‘जादू’ पर विश्वास करता है? क्या बरसों से चल रही बीपी की दवाइयां सच में कूड़ेदान में फेंकी जा सकती हैं?

इन अहम सवालों के जवाब जानने के लिए हमने दो शीर्ष विशेषज्ञों, डॉ. संजीव चौधरी (चेयरमैन, कार्डियोलॉजी, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम) और डॉ. सीमा धीर (यूनिट हेड व सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स) से बात की. आइए जानते हैं कि इस ‘रिवर्सल’ का असली सच क्या है और अचानक दवा छोड़ने की ग़लती आप पर कितनी भारी पड़ सकती है.

रिवर्सल का असली मतलब: जादू नहीं, एक लंबी प्रक्रिया

क्या हाई बीपी सच में रिवर्स या जड़ से ख़त्म हो सकता है?

डॉ. सीमा धीर इस ग़लतफ़हमी को दूर करते हुए कहती हैं, “रिवर्सल का मतलब यह बिलकुल नहीं है कि बीमारी हमेशा के लिए ख़त्म हो गई. मेडिकल साइंस में इसका मतलब है कि व्यक्ति का ब्लड प्रेशर लंबे समय तक बिना दवा या कम दवा के सामान्य स्तर पर आ जाए.”

डॉ. धीर बताती हैं कि हाई बीपी अक्सर ख़राब खान-पान, ज़्यादा नमक, तनाव, मोटापे और ‘सेडेंटरी लाइफ़स्टाइल’ (दिनभर बैठे रहना) के कारण होता है. अगर आप अपनी लाइफ़स्टाइल सुधार लें, तो इसे काफ़ी हद तक कंट्रोल या रिवर्स किया जा सकता है. लेकिन जिन्हें किडनी की बीमारी है, हार्मोनल समस्या है या जिनके परिवार में (जेनेटिक) हाई बीपी चला आ रहा है, उनके लिए इसे पूरी तरह से ‘ख़त्म’ करना मुश्किल होता है.

क्या हार्ट और नसें पूरी तरह ‘हील’ हो जाती हैं?

अगर बीपी नॉर्मल हो जाए, तो क्या दिल को पहले हुआ नुक़सान पूरी तरह ठीक हो जाता है?

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजीव चौधरी समझाते हैं: “बीपी कंट्रोल होने से हार्ट और ब्लड वेसल्स (नसों) पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है. शुरुआती बदलाव जैसे हार्ट की मोटाई बढ़ना या धमनियों की कड़कपन (Stiffness) कुछ हद तक सुधर सकते हैं. लेकिन लंबे समय तक हाई बीपी रहने से जो नुक़सान हो चुका है, वह हमेशा 100% रिवर्स नहीं होता.” 

इसलिए डॉक्टर हमेशा ज़ोर देते हैं कि बीपी को शुरुआती स्टेज में ही कंट्रोल कर लेना चाहिए.

युवाओं (20-30 साल) में रिवर्सल के ज़्यादा चांस क्यों हैं?

आजकल 20 से 30 साल के युवाओं में भी हाई बीपी की समस्या आम हो गई है. लेकिन अच्छी ख़बर यह है कि युवाओं में इसके ‘रिवर्स’ होने की संभावना उम्रदराज़ लोगों से कहीं ज़्यादा होती है.

डॉ. सीमा धीर के अनुसार: “जब आप युवा होते हैं और शुरू में ही बीमारी पकड़ में आ जाती है, तो शरीर के अंगों को न के बराबर नुक़सान होता है. अगर किसी युवा का बीपी मोटापे, तनाव या ख़राब नींद से बढ़ा है, तो वज़न घटाने और अच्छी डाइट लेने से शरीर बहुत जल्दी रिकवरी करता है.” हालांकि, अगर फ़ैमिली हिस्ट्री मज़बूत है, तो सिर्फ़ लाइफ़स्टाइल काफ़ी नहीं होती, दवाइयां भी ज़रुरी हो जाती हैं.

अचानक दवाइयां छोड़ना है ‘हार्ट अटैक’ को दावत!

सोशल मीडिया पर कुछ रिवर्सल प्रोग्राम (High BP Reversal) देखकर कई लोग अचानक अपनी बीपी की दवाइयां बंद कर देते हैं.

डॉ. संजीव चौधरी इसे बेहद ख़तरनाक मानते हैं. वे चेतावनी देते हैं: “अचानक दवाइयां बंद करने से ‘रिबाउंड हाइपरटेंशन’ (Rebound Hypertension) हो सकता है, यानी बीपी अचानक बहुत ज़्यादा बढ़ सकता है. इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक या हार्ट फेल्योर का ज़बरदस्त जोखिम रहता है.”

दवा छोड़ने का सही तरीक़ा यह है कि डॉक्टर की निगरानी में धीरे-धीरे डोज़ (Dose) कम की जाए और घर पर नियमित रूप से बीपी मॉनिटर किया जाए.

2026 की नई तकनीक और ‘AI स्मार्टवॉच’ का सच

आजकल हर दूसरे व्यक्ति के हाथ में स्मार्टवॉच है जो बीपी और हार्ट रेट ट्रैक करती है. क्या यह फ़ायदेमंद है?

डॉ. सीमा धीर मानती हैं कि इन आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) गैजेट्स ने लोगों को जागरूक बनाया है. “मरीज़ ख़ुद देख सकता है कि तनाव या कम नींद के बाद उसका बीपी कैसे बदलता है. लेकिन पूरी तरह इन पर निर्भर रहना ग़लत है. कई बार ये मेडिकल ग्रेड के नहीं होते और ग़लत रीडिंग दे देते हैं. बार-बार बीपी चेक करने से बेवजह का तनाव बढ़ता है, जो खुद बीपी बढ़ा देता है.”

वहीं, एडवांस इलाज़ पर बात करते हुए डॉ. संजीव चौधरी बताते हैं कि 2026 तक ‘रेनल डीनर्वेशन’ (Renal Denervation) जैसी नई थेरेपी और दवाइयां सामने आई हैं, जो जिद्दी (Resistant) बीपी में मददगार हैं. लेकिन फिर भी, इनका लक्ष्य स्थायी इलाज नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म कंट्रोल ही है.

दवाएं बंद होने के बाद भी क्यों ज़रुरी है सतर्कता?

अगर लाइफ़स्टाइल सुधारने से आपका बीपी नॉर्मल हो गया है और डॉक्टर ने दवाइयां बंद कर दी हैं, तो क्या आप बिलकुल आज़ाद हैं?

डॉ. संजीव चौधरी का जवाब है, नहीं. “पुराने हाई बीपी का शरीर पर एक ‘वैस्कुलर मेमोरी इफ़ेक्ट’ (Vascular memory effect) रह सकता है. इसलिए दवाएं बंद होने के बाद भी व्यक्ति का जोखिम एक सामान्य (नॉन-बीपी) व्यक्ति जितना नहीं हो जाता.”

हाई बीपी कोई बुखार नहीं है जो एक बार की दवा से हमेशा के लिए चला जाए. यह एक लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर है. ‘रिवर्सल’ का असली मतलब अपनी लाइफ़स्टाइल को हमेशा के लिए बदल देना है. वज़न कंट्रोल में रखें, नमक कम खाएं, रोज़ 45 मिनट वॉक करें और अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें. सही मायनों में यही आपका सबसे बड़ा रिवर्सल है.

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