क्या आप सच में अमीर हैं? जानिए सच्ची दौलत और ख़ुशी का मतलब
Ravi Pratap Dubey
आज की इस आपाधापी और भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हमने सफलता का दायरा बहुत छोटा कर दिया है. हमारे लिए अब कामयाबी का मतलब सिर्फ़ भारी-भरकम बैंक बैलेंस, चमचमाती गाड़ियां, महंगे ब्रांडेड कपड़े और सोशल मीडिया पर चमकती हुई बनावटी मुस्कान बनकर रह गया है लेकिन कभी फ़ुर्सत में बैठकर ठंडे दिमाग से सोचिए कि क्या वाकई इसी का नाम “अमीर” होना है?
दरअसल, आज के दौर में खुद को हर वक्त ‘परफ़ेक्ट’ और कामयाब साबित करने की जो होड़ लगी है, उसकी थकान ही सबसे बड़ी थकान हो गयी है. सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक हमें दफ़्तर में, समाज में और दुनिया के सामने एक नकाब पहनकर जीना पड़ता है. मजबूत दिखने की कोशिश, निडर होने का नाटक और अंदर से टूटकर भी बाहर से मुस्कुराने की मजबूरी… यह अभिनय इंसान को अंदर से खाली कर देता है.
ऐसे में ज़रा रुककर अपनी ज़िंदगी का हिसाब लगाइए. अगर आपके पास पूरी दुनिया में कोई एक भी इंसान ऐसा है:
-
जिसके सामने आपको खुद को सफल साबित करने के लिए पापड़ न बेलने पड़ें,
-
जिसके आगे आपको हर वक्त मजबूत और ‘सुपरहीरो’ बनने की ज़रूरत न महसूस हो,
-
जहां आप अपने डर, अपनी नाकामियां और अपनी कमज़ोरियां बिना किसी झिझक के बयां कर सकें,
-
जहां उदास होने पर आपको खुशी का झूठा मुखौटा न पहनना पड़े…
तो यकीन मानिए, आप इस दुनिया के सबसे समृद्ध और खुशनसीब लोगों में से एक हैं.
अगर आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसा कंधा है, जहां आप बेफ़िक्र होकर सिर रख सकें, जहां बनावट और दिखावे की कोई जगह न हो, तो वही आपकी सबसे बड़ी दौलत है. पैसे, ओहदे और गाड़ियां तो वक्त के साथ आ-जा सकते हैं, लेकिन एक ऐसा ‘सुरक्षित कोना’ जहां आप बिना किसी फ़िल्टर के 100% असली ‘आप’ रह सकें, वो हर किसी को नसीब नहीं होता. जहां बनावट खत्म होती है, असल मायनों में सच्ची शांति और समृद्धि की शुरुआत वहीं से होती है.
चलते-चलते एक बात और आज रात सोने से पहले खुद से एक सवाल ज़रूर पूछिएगा, क्या आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसा शख्स है, जिसके सामने आप अपना हर नकाब उतारकर चैन की सांस ले सकें? अगर जवाब ‘हां’ है, तो अपने इस रिश्ते की कद्र कीजिए और आज ही उन्हें एक शुक्रिया ज़रूर कहिए क्योंकि पैसों का अंबार तो लगाया जा सकता है, लेकिन सच्चे और दिल से जुड़े रिश्तों को कमाना ही असली अमीरी है.