फलों का राजा आम: भारत की शान, किस्में और रोचक इतिहास
Sunita Thatte
भारत में ग्रीष्म ऋतु आने से पहले ही आम की चर्चा शुरू हो जाती है. आम केवल फल ही नहीं, पूरी एक संस्कृति है जो संपूर्ण भारत को अपनी परिधि में रखती है. इसका अर्थ है कि भारत में प्रत्येक स्थान पर आम लोकप्रिय है और हर जगह इसकी फ़रमाइश होती है. गांव-देहात में तो पुराने ज़माने में झोपड़ी के आगे एक आम का पेड़ अवश्य होता था.
शहर की संस्कृति में हमें आम बाज़ार से खरीदने पड़ते हैं. आम की इतनी अधिक नस्लें हैं कि इनकी विशेषताओं को शब्दों में पूरी तरह परिभाषित नहीं किया जा सकता.
भारत में आम की प्रसिद्ध किस्में और उनकी ख़ासियत
आम की पैदावार भारत के लगभग सभी भागों में होती है. हर स्थान की अपनी एक विशेषता होती है और वहां के निवासी उस आम को श्रेष्ठ बताते हैं:
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दक्षिण का बेगमपल्ली और दशहरी: जैसे ही चैत्र समाप्त होता है, हैदराबाद का बेगमपल्ली आम बाज़ारों में आ जाता है. अब हैदराबाद में विशेषज्ञों ने ग्राफ़्टिंग करके दक्षिण का ‘दशहरी’ भी विकसित किया है, जो मलीहाबाद की बराबरी तो नहीं कर सकता पर स्वाद में बेहतरीन है.
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उत्तर प्रदेश के खास आम: यूपी में मिलने वाले लंगड़ा, दशहरी और चौसा बहुत अच्छे और किफ़ायती होते हैं. लखनऊ का नवाब ‘दशहरी’ है, तो बनारस वालों के लिए ‘लंगड़ा’ ही राजा है.
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कोंकण का हापुस (Alphonso): देवगिरि और रत्नागिरी का हापुस आम बहुत महंगा और लोकप्रिय है. महाराष्ट्र वाले तो अपने हापुस के आगे किसी और को मानते ही नहीं.
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बंगाल का हिमसागर: यह आम इतना किफ़ायती और अच्छा होता है कि गरीब से गरीब परिवार भी इसका भरपूर सेवन कर सकता है और इसकी फ़सल भी भरपूर होती है.
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गुजरात का केसर: जूनागढ़ और गिर का केसर आम विदेशों में भी बहुत लोकप्रिय है.
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बिहार के आम: आम की विशिष्टता में बिहार भी अग्रणी है. यहां का जर्दालु और लंगड़ा काफ़ी मशहूर है, साथ ही यहां कई नई किस्में भी विकसित की गई हैं.
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सदाबहार ‘आम्रपाली’: हॉर्टिकल्चर के प्रसिद्ध विशेषज्ञ संतराम जी (पंतनगर) ने आम की अनेक किस्में विकसित कीं. उन्होंने ‘आम्रपाली’ नामक किस्म को सफ़ल रूप से विकसित किया, जो किसी भी जलवायु में भारत में कहीं भी फल दे सकती है.
महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में आम के लज़ीज़ व्यंजन
ग्रीष्म ऋतु का यह सबसे लोकप्रिय फल पुराने ज़माने से हर तबके के परिवारों के भोजन का हिस्सा रहा है. देशी रसीले आम स्वास्थ्य के लिए भी अच्छे होते हैं.
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आमरस और आम्रखंड: महाराष्ट्र में तो गर्मियों में रोज़ ही रोटी या पूरी के साथ आमरस खाने की प्रथा है. यहां श्रीखंड के साथ मिलाकर ‘आम्रखंड’ भी बनाया जाता है.
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आम का पुलाव: महाराष्ट्र में आम डालकर पुलाव बनाया जाता है जो बहुत ही अनोखा और स्वादिष्ट व्यंजन है. इसे 3-4 दिन तक गरम करके खाया जा सकता है.
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मैंगो कैंडी और बर्फ़ी: महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में आम के रस को कढ़ाई में पकाकर कैंडी बनाई जाती है. यह प्रक्रिया सरल नहीं है; उबलते समय हाथ पर छींटे पड़ने से जलने की संभावना रहती है, इसलिए सावधानी रखनी पड़ती है. शक्कर और मावा डालकर बनी आम की बर्फ़ी भी यहां बहुत लोकप्रिय है.
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उत्तर प्रदेश का अंदाज़: यूपी में अधिकतर लोग आम काट कर खाते हैं अथवा छोटे देशी आम चूसकर भोजन का हिस्सा बनते हैं. इसके अतिरिक्त आम पापड़, आम का जैम और दूध के साथ मैंगो शेक पूरे भारत में पसंद किया जाता है.
लंबे समय तक स्वाद लेने के लिए महाराष्ट्र में आम को टिन में पैक करके सील करने की प्रथा है. इसे फ़्रिज में रखकर साल भर तक भी स्टोर किया जा सकता है.
5000 साल पुराना है आम का इतिहास
आम का इतिहास 5000 साल पुराना है. मोहनजोदड़ो की खुदाई में आम का ज़िक्र आता है. कालिदास की रचनाओं में भी आम के मधुर और रसीले स्वाद की प्रशंसा की गई है.
मुगल शासकों को तो यह फल इतना भाया था कि अकबर ने एक लाख पेड़ों की अमराई (आम का बाग) लगवाई थी.
दशहरी का रोचक इतिहास: दशहरी का नाम लखनऊ के दशहरी गांव के एक पेड़ से पड़ा. करीब 300 साल पुराना यह पेड़ आज भी फल देता है और अन्य सभी पेड़ इसी की कलम से लगाए गए हैं. सबसे पुराने इस पेड़ की ख़ासियत यह है कि आज भी इसका आम सबसे मीठा होता है.
आख़िर इसका नाम ‘आम’ क्यों पड़ा?
अब प्रश्न यह है कि इसका नाम ‘आम’ क्यों पड़ा? इसका सीधा सा कारण है कि यह फल हर आम आदमी तक पहुंचता है और हर आम आदमी को पसंद है. कोई अतरंगी ही ऐसा होगा जिसे आम पसंद न हो. इसीलिए इस आम को ख़ास बनाया है आम आदमी ने.